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शुक्रवार, 30 नवंबर 2012

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रविवार, 9 सितंबर 2012

YOUNG AZAMGARH: समाजवाद क्यों ? - एल्बर्ट आइंस्टीन

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मंगलवार, 10 जुलाई 2012

बाज़ार


Monday, July 2, 2012
बादल हैं या 
हवा के जाल फँसी 
ह्वेल  मछलियाँ हैं ,
घसीटता मछुआरा  
ले जाता खैंच 
पश्चिमी बाज़ार 
अरे ! क्या इनको भी
डालेगा बेंच ??

सुबूत


ऐसे भागा 
जैसे गलत पते पर बरस गया हो ,
अपने उस भाई से 
जो सूरज ढके हुए था 
हटने को बोल गया 
ताकि बरसा हुआ पानी 
जल्दी सूख जाए 
और इस तरह उसने 
अपनी गलती का
कोई सुबूत नहीं छोड़ा !

कमजोरी



Saturday, July 7, 2012
बहुत कमजोर हो गई थी वह 
कि 
आधी रोटी 
खाने बाद ही............. मर सकी !

लाल चुन्नी जाग !!



Sunday
इस बार भी आएगा 
वो भेड़िया 
अपने कृपा-हास में दाँत  ,
वरद-हस्त में नाखून 
और 
मधुर शब्दों में 
मसूढ़ों की लालिमा छिपाए 
नन्ही लाल चुन्नी की नानी बनकर 

और शायद इस बार 
एन मौके पर 
कोई लकड़हारा 
उधर से न गुजरे !


Monday, June 25, 2012
मैं उतना ही नहीं हूँ 
जितना आपके सामने बैठा हूँ 
वह भी हूँ 
जो आपके सामने बैठेगा 
कल,परसों,और आगे के दिनों में |


अगर मेरी नाव
अभी भी पानी में है 
रेत पर नहीं ,
तो यकीन मानिए 
बीज  के भीतर मौजूद है 
एक पेड़ ,
पेड़ के भीतर 
जड़ें हैं ,शाखाएँ हैं,पत्ते हैं, 
पत्तों के भीतर पंछी हैं, 
पंछियों के भीतर 
घोंसले हैं 
और घोंसलों में उनके 
अंडे हैं ,बच्चे हैं |

अकारण ही नहीं फूल जाते हैं पेट 
और सिर्फ हवा ही नहीं भरी होती है उनमे 
कुछ है जो कल बाहर आएगा 
और तुम्हें हैरान कर देगा, 
क्या हैरान होने के लिए 
तुम्हारी कोई तैयारी है ?
क्या तुम इस तैयारी की 
कोई ज़रूरत महसूस करते हो?

कुछ लोग ज़रूरत 
तभी महसूस करते हैं 
जब वह उन्हें
कुचल कर आगे निकल जाती है 
लेकिन 
तुम मुझे ऐसे तो नहीं लगते !!