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गुरुवार, 3 मई 2012

जाते हुए उसको

जाते हुए उसको
बड़ी हसरत से देख रहा था 
कि पकड़ गया !!

झट 
मैंने अपनी जेब से 
जो कमीज़ में कहीं नहीं थी 
एक कागज़ निकाला 
जो जेब में था ही नहीं 
और उसमें बड़े गौर से
वह पढ़ता रहा
जो उसमें नहीं लिखा था ,

जब तक वह चली नहीं गई !

2 टिप्‍पणियां:

  1. दिल को छू गयी ये पंक्तियाँ! बहुत ही सुन्दर और लाजवाब रचना लिखा है आपने जो काबिले तारीफ है! बधाई!

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