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सोमवार, 21 जनवरी 2013

बधाई


पर्व की बधाई न दे सकूँगा  
उन्हें 
जो इसे 
नहीं मना सकेंगे ,
न उन्हें 
जो इसे 
उनके बिना मनाएंगे ।

गोल पत्थर


Saturday, November 17, 2012
वह पत्थर
गोल तो नहीं था
लेकिन एक लम्बी ढलान पर
देर तक लुढ़कने के बाद
गोल हो गया !

अब एक हलकी -सी ठोकर
उसे दूर तक लुढ़का देती है |

लेकिन एक और पत्थर भी है
उससे भी ज्यादा गोल और चिकना
--उसका प्रतिरोध ,
जब लुढ़कता है
उससे भी आगे जाता है |

परिवर्तन


नदी के बहते पानी की तरह
नहीं होता है परिवर्तन, 
वह होता है --
जैसे सीढ़ियों पर रखे हों बर्तन ,
पहले एक भरे
फिर उससे होकर दूसरे में 
गिरने लगे  पानी 
तब तक तीसरा
इंतज़ार करे.........
.......................
......................
तुम किस बर्तन में हो
जानते हो ? 

निरर्थ


जुल्म और अन्याय के खिलाफ 
तुम्हारा नारे लगाना
समझ में आता है 
लेकिन  
बिलकुल समझ में नहीं आता 
सिर्फ नारे लगाना 
और हर बार 
हक पाए  बिना 
खाली हाथ लौट आना !

दो क्षणिकाएँ


यह लोहे की फ़ुटबाल है !!

इससे लोहे के पैर वाले खेलते हैं 
बाक़ी 
इस पर पैरों को लोहा बनाने  का 
अभ्यास करते हैं !

2-
मेरा घर ही मेरा देश है 
उसके चारों  और एक बाज़ार है 
और उसके आगे
दूर-दूर तक 
फैला हुआ  हुआ अखबार है |

वे नदियाँ


१.
मैं खोल देना चाहता हूँ 
नदियों के तटबन्ध 
ताकि वे बहक जाएँ  
और किसी दिन किसी दरार के रास्ते 
मेरे घर में सरक  आयें 
झूठ मूठ मेरे न न करने पर भी
मुझे भिगो दे ,नहला दें और ठंडा कर दें
और वापस चली जाएँ
नाली के रास्ते | 
२.
वे मेरी आँखें नहीं धो पातीं 
मेरे नहा चुकने के बाद 
वे नदियाँ 
मुझे नाली लगती हैं !

चिड़िया


अब वह चिड़िया मछली बन गई है ! 
कल तक जो  
अचानक फुर्र से आकर 
मेरी जाँघों या कन्धों पर बैठ जाया करती थी 
और एक सुन्दर ,सुकोमल ,रंगीन पंख 
मेरे लिए छोड़ जाया करती थी 
ढेर सारे  पंख हो गए थे मेरे पास 
जिन्हें मैं सबको दिखाता 
उनकी  आँखों में पंखों के लिए प्रशंसा होती 
और मेरे लिए ईर्ष्या के काँटे 
लेकिन वे काँटे मुझ तक आते-आते
फूल बन जाते और मुझे महका देते 
मेरे लिए अब वह चिड़िया सिर्फ पंखों का गुच्छा थी 
जिन्हें मैं  पाना चाहता था  
एक दिन वह मेरी इच्छा भांप गई और चली गई 
जाते वक़्त उसने मुझसे कहा था--
"हजारो साल की विकास-यात्रा तय करके
मैं चिड़िया बनी थी 
तुम्हारी हवस ने मुझे फिर से मछली बना दिया है 
अब तुम तक
मैं उड़ कर नहीं  पहुँच पाउंगी 
हाँ,तुम मुझे अपनी बंसी में फंसा सकते हो 
लेकिन तब 
मैं बाहर आते ही  मर जाउंगी !