१--
छाती तक चढ़ी
मँहगाई की नदी का पूरा दबाव है
आदमी पर
कि वह मछली बन जाए
और सिर्फ चारा देखे
चारे में छिपा काँटा न देख पाए !
२--
मंहगाई ने
चौकी को और छोटा कर दिया ,
जो रिश्ते किनारे बैठे थे
जमीन पर गिर पड़े !
छाती तक चढ़ी
मँहगाई की नदी का पूरा दबाव है
आदमी पर
कि वह मछली बन जाए
और सिर्फ चारा देखे
चारे में छिपा काँटा न देख पाए !
२--
मंहगाई ने
चौकी को और छोटा कर दिया ,
जो रिश्ते किनारे बैठे थे
जमीन पर गिर पड़े !
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